Holi 2026 LIVE: आज देशभर में धूमधाम से मनाई जा रही है, राजस्थान में विदेशी मेहमानों ने उड़ाया रंग-गुलाल, अखिलेश यादव ने मनोज तिवारी पर वीडियो सॉन्ग बनाया, पढ़ें होली जुड़ी हर खबर प्रखर प्रहरी पर...
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दिल्लीः बुराई पर अच्छाई की जीत की प्रतीक होली आज देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। आपको बता दें कि देशभर में होलिका दहन सोमवार (2 मार्च) को हुआ था, लेकिन चंद्रग्रहण की वजह से देश के ज्यादातर हिस्सों में लोगों ने मंगलवार को रंगों का पर्व होली मनाई और रंग नहीं खेल पाए।
हालांकि राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में उमंग और उल्लास का माहौल रहा। सड़कों पर रंगों में सजी टोलियां निकलीं। जयपुर में होली मनाने दुनिया के कोने-कोने से मेहमान आए। विदेशी मेहमानों ने DJ की धुन पर खूब डांस किया। वहीं भरतपुर में 200 साल पुरानी परंपरा ‘बिन दुल्हन की बारात’ निभाई गई। इसमें दूल्हे को पारंपरिक वेशभूषा में ऊंट पर बैठाया गया। बैंड-बाजे और होली के गीतों के बीच बारात जैन मंदिर पहुंची।
उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी सांसद मनोज तिवारी पर 01 मिनट 14 सेकेंड का वीडियो सॉन्ग बनाकर उन्हें होली विश किया। इसमें मनोज तिवारी का मुखौटा पहने एक शख्स घूमता हुआ देखा जा सकता है।
होली को देखते हुए दिल्ली समेत कई राज्यों में पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से होली मनाने की अपील की है।
होली से जुड़ी मान्यताएं…
वसंतोत्सव: ऋतु बदलने का उत्सव होली पहले वसंतोत्सव के तौर पर मनाई जाती थी, क्योंकि फाल्गुन-पूर्णिमा के आसपास ठंड विदा होती है और वसंत का रंग दिखने लगते हैं। 7वीं सदी में सम्राट हर्ष के नाटक रत्नावली में इसका जिक्र है वसंत के मौके पर दरबारी उत्सव, संगीत और सांस्कृतिक आयोजन करते थे। वसंतोत्सव मनाने की ये परंपरा तब से चली आ रही है। अब ये उत्सव लोकजीवन में उतरकर अबीर-गुलाल और रंगों की होली में बदल गया।
दोलयात्रा: राधा-कृष्ण को झूले पर विराजित करने की परंपरा पूर्वी भारत और वैष्णव परंपराओं में होली का बड़ा रूप दोलयात्रा या दोल पूर्णिमा है। इस परंपरा में राधा-कृष्ण की मूर्तियों को सजाकर झूले या पालकी पर निकाला जाता है। उन पर अबीर-गुलाल चढ़ाया जाता है और कीर्तन-उत्सव होता है। ओडिशा की सरकारी जानकारी के मुताबिक यह उत्सव फाल्गुन महीने की दशमी से दोल पूर्णिमा तक चलता है। बंगाल-ओडिशा क्षेत्र में, यही दिन चैतन्य महाप्रभु की जयंती से भी जुड़ गया। ये पहले वैष्णव झूला-उत्सव था। बाद में रंगों वाली होली से जुड़ गया।
राधा-कृष्ण फाग: प्रेम, रंग और लीला की होली ब्रज क्षेत्र में होली की सबसे बड़ी दूसरी मान्यता राधा-कृष्ण की फाग-लीला है। वैष्णव ग्रंथ गर्ग संहिता में होलिकोत्सव के बारे में लिखा गया है। जिसमें राधा और सखियों के साथ उत्सव का जिक्र है। इसी वजह से मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव की होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि कृष्ण-भक्ति, फाग-गायन और लीलाओं को याद करने का उत्सव मानी जाती है। बाद में यही परंपरा लोकहोली में बदल गई। जहां मंदिर की रंग-सेवा से आगे बढ़कर गांव-शहर की सामूहिक होली बनी।
किसानों का त्योहार: नई फसल और रबी सीजन का उल्लास होली को लंबे समय से फसल और खेती से भी जोड़ा जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार होली वसंत और फसल का उत्सव है। पहले इस त्योहार का रूप खेती पर आधारित था। इसमें किसान होलिका दहन में गेहूं की बालियां, नई उपज चढ़ाते थे और पूरा गांव नई फसल का उत्सव मनाता था। बाद में इसमें रंग, गुलाल और दूसरे धार्मिक-सांस्कृतिक रूप भी जुड़ते गए।
रिश्ते सुधारने का पर्व: बुरा न मानो होली है अमेरीका, ऑस्ट्रेलिया और स्कॉटलेंड के एंथ्रोपॉलॉजिस्ट ने अपनी स्टडी और रिसर्च में बताया कि भारत में होली ऐसा त्योहार है, जिसमें लोग पुराने विवाद और मनमुटाव को भूलकर त्योहार मनाते हैं। हालांकि बाद में रिश्तों और समाज कर कड़वाहट और तनाव फिर से वैसा ही हो जाता है। अमेरिकी एंथ्रोपॉलॉजिस्ट मैककिम मैरियट, ऑस्ट्रेलिया के डी. बी. मिलर और स्कॉटलेंड के विक्टर टर्नर के अनुसार भारत में होली पुरानी कड़वाहट कम करने, लोगों को करीब लाने और रिश्तों में नई शुरुआत करने का पर्व है।
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