संवाददाताः संतोष कुमार दुबे

दिल्लीः दिल्ली विधानसभा में सोमवार को CAG की एक और Report रखी गई। दिल्ली की बीजेपी सरकार ने सोमवार को  विधान सभा में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के काम-काज पर नियंत्रक एवं  महालेखा परीक्षक (कैग) की लम्बित रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें किराया तय करने की आजादी न होने,  बसों के खराब रख रखाव और मार्गों के नियोजन में  खामी के कारण हुए भारी नुकसान सहित परिचालन में 14,198.86 करोड़ रुपये का  घाटा उजागर हुआ है। इस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सदन के पटल पर रखा।

बजट सत्र के पहले दिन  कैग की डीटीसी संबंधी 2015-16 से 2021-22 तक की अवधि से संबंधित रिपोर्ट को सदन पटल पर रखा गया। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान डीटीसी को बसों के बार-बार  खराब होने और रूट प्लानिंग में खामियों के कारण 2015-22 के बीच 668.60  करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान हुआ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि  किराया निर्धारण की स्वतंत्रता न होने के कारण डीटीसी अपना परिचालन खर्च भी नहीं निकाल पा रही है। दिल्ली सरकार ने 2009 के बाद  से राजधानी में बस किराये में कोई वृद्धि नहीं कर सकी, जिससे निगम की आय  प्रभावित हुई। इसके अलावा, विज्ञापन अनुबंधों में देरी और डिपो की खाली  जमीन का व्यावसायिक इस्तेमाल न करने से भी निगम को संभावित राजस्व का नुकसान हुआ।
कैग की रिपोर्ट के अनुसार तकनीकी परियोजनाओं में भी  डीटीसी की कई परियोजनाएं निष्क्रिय पड़ी हैं। स्वचालित किराया संग्रह  प्रणाली (एफसीएस) 2017 में लागू की गई थी, लेकिन 2020 से यह निष्क्रिय है।  रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ है कि  वर्ष 2021 में 52.45 करोड़ रुपये खर्च  कर बसों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी अब तक पूरी तरह से चालू नहीं हो  सके। रिपोर्ट में प्रबंधन और आंतरिक नियंत्रण की भी कमी देखी गई है। स्टॉफ  की सही संख्या तय करने की कोई नीति नहीं बनाई गई, जिसके कारण चालक,  तकनीशियन और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भारी कमी रही, जबकि कंडक्टरों की  संख्या आवश्यकता से अधिक पाई गई।

कैग की रिपोर्ट के अनुसार 2015 में डीटीसी के पास 4344 बसें थीं, जो मार्च 2022 में घटकर 3937 हो गईं। कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी की जनसंख्या के  मद्देनजर 5500 बसों की जरूरत थी, लेकिन सरकार यह जरूरत पूरी नहीं कर सकी।  कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार से आर्थिक सहायता मिलने  के  बावजूद डीटीसी केवल 300 इलेक्ट्रिक बसें ही खरीद सकी।

कैग की रिपोर्ट  में कहा गया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2007 में 11 हजार बसों खरीदने  का आदेश दिया था, लेकिन दिल्ली कैबिनेट ने 2012 में इसमें संशोधन करके 5500  बसों का लक्ष्य रखा था, जिसे पूरा नहीं किया गया। कैग ने अपनी रिपोर्ट में  बताया है कि 31 मार्च 2023 तक राष्ट्रीय राजधानी में 1770 बसें 10 साल से  अधिक पुरानी और समयपार हो चुकी थीं।

कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 2015 में पुरानी हो चुकी लो फ्लोर  बसों की संख्या पांच ( 0.13 प्रतिशत) से बढ़कर 2022 में 656 (17.44 प्रतिशत) पर पहुंच गई। इसके बाद स्थित और बदतर हुई और 31 मार्च 2023 तक  यह संख्या 1770 हो गई, जो डीटीसी के बेड़े में बसों की कुल संख्या का  44.96 प्रतिशत है। डीटीसी लगातार घाटे में इसलिए भी जा रही है, क्योंकि  2009 के बाद यहां किराया नहीं बढ़ाया गया है। इस संबंध में कई बार सरकार को  प्रस्ताव भेजा गया, जिसें मंजूरी नहीं दी गई।

कैग की रिपोर्ट में बताया  गया है कि निगम खुद के द्वारा परिचालित किसी भी मार्ग पर परिचालन लागत को  वसूल नहीं सका, जिसके कारण 2015-22 तक 14198.86 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।

बीजेपी विधायक हरीश खुराना ने इस रिपोर्ट पर सदन में चर्चा की शुरुआत करते  हुए पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के  कुप्रबंधन और वित्तीय अनियमितता करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व  मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना के अधीन डीटीसी लाभ में चल रही थी, लेकिन उसके  बाद डीटीसी घाटे में आ गई और यह बढ़कर 8498.33 करोड़ रुपये हो गया। इनमें  से 5000 करोड़ रुपये का घाटा आप के कार्यकाल में बढ़ा। उन्होंने कहा कि डीटीसी की परिचालन आय आप के सत्ता में आने के समय 914 करोड़ रुपये से घटकर  558 करोड़ रुपये रह गई। उन्होंने कहा कि आप सरकार ने किराया वसूले बिना  डीटीसी की 3.18 लाख वर्ग मीटर जमीन निजी क्लस्टर बसों को आवंटित कर  दिया जिससे  225 करोड़ रुपये की आमदानी का नुकसान हुआ।

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि कैग की रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया है  कि आप  ने डीटीसी को भी लूटने का काम किया है।  उन्होंने कहा कि डीटीसी को  राष्ट्रीय राजधानी में  करीब 814  रूट पर चलाना था,  लेकिन वह सिर्फ 468  रूट पर ही चल रही है।  उन्होंने कहा कि इसीलिए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद  केजरीवाल और उनके भ्रष्ट नेता कैग की रिपोर्ट से डरे हुए थे और उसे  सार्वजनिक नहीं कर रहे थे। आप नेता ये नहीं चाहते थे कि कैग रिपोर्ट  विधानसभा में पेश की जाए।  आप  ने गरीबों का गला घोटने का काम किया है ।

इससे पहले विपक्ष की नेता आतिशी ने विधानसभा में कैग की रिपोर्ट पर  चर्चा विरोध किया और कहा कि इस रिपोर्ट को पढ़ने के लिए समय दिया जाना  चाहिए। उन्होंने अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता से कहा, “हम भी चाहते हैं कि इस  रिपोर्ट पर चर्चा हो, लेकिन इसे पढ़ने के लिए समय दिया जाना चाहिए। ”

उन्होंने इस रिपोर्ट पर बुधवार को चर्चा कराने का सुझाव दिया।  श्री गुप्ता ने कहा कि इस रिपोर्ट पर बुधवार को भी चर्चा होगी, लेकिन जो  सदस्य इस रिपोर्ट पर अभी अपना मत रखना चाहते हैं, वे रख सकते हैं। इस दौरान कैग की रिपोर्ट पर आप के विधायक हंगामा करते रहे और बाद में सदन से बहिर्गमन कर गये।

गौरतलब है कि दिल्ली भाजपा सरकार राष्ट्रीय राजधानी से संबंधित कैग की  लंबित 14 रिपोर्टों में से अब तक तीन रिपोर्ट को सदन के पटल पर रख चुकी है।  रेखा सरकार से सबसे पहले दिल्ली की आबकारी नीति से संबंधित कैग की रिपोर्ट  को सदन के पटल पर रखा था। इसके बाद स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित कैग की  रिपोर्ट की लंबित रिपोर्ट रखी गई थी।

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