दिल्लीः आरएसएस (RSS) यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने समलैंगिकों की शादी के मुद्दे पर केंद्र सरकार के नजरिए समर्थन किया है। हरियाणा के पानीपत में चल रही RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने मंगलवार को कहा कि शादी सिर्फ अपोजिट सेक्स वालों के बीच ही हो सकती है।
आपको बता दें कि आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की हरियाणा के सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र पट्टीकल्याण समालखा (पानीपत) में 12 मार्च को शुरू हुई सभा की तीन दिवसीय बैठक के आखिरी दिन मंगलवार को दत्तात्रेय होसबोले ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) RSS की सबसे बड़ी और अहम इकाई है, जिसे संघ का थिंक टैंक भी कहा जाता है। संघ से जुड़े सारे अहम फैसले और रणनीति इसी में बनती है। पानीपत में हुई सभा की इस बैठक में BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा तीनों दिन मौजूद रहे।
इस दौरान सरकार्यवाह होसबोले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लंदन में दी गई स्पीच पर भी अपना पक्ष रखा और कहा, “इस पर टिप्पणी करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि राहुल गांधी का अपना पॉलिटिकल एजेंडा है। RSS की सच्चाई हर कोई जानता है। फिर भी देश की मुख्य विपक्षी पार्टी का बड़ा नेता होने के नाते राहुल गांधी को और ज्यादा जिम्मेदारी से बोलना चाहिए।“
उन्होंने बताया कि इमरजेंसी के वक्त मैं भी जेल गया था। मेरे अलावा देश के अनेक लोग जेल में डाले गए थे। इंदिरा, राजीव, सोनिया के बाद अब राहुल गांधी भी संघ के बारे में विवादित टिप्पणी कर रहे हैं। वे कह रहे हैं लोकतंत्र खतरे में है। अब चुनाव नजदीक है। लोकतंत्र खतरे में होता तो हम इकट्ठा नहीं हो पाते। कांग्रेस को लोकतंत्र के बारे में बोलने का कोई नैतिक आधार नहीं है। कांग्रेस ने आज तक इमरजेंसी के लिए भी देश से माफी नहीं मांगी।
वहीं समलैंगिकों की शादी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में शादी एक संस्कार है। यह कोई कॉन्ट्रैक्ट या दो इंडीविजुअल लोगों के एन्जॉयमेंट की चीज नहीं है।
सरकार्यवाह होसबोले ने कहा कि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) की इस 3 दिवसीय बैठक में चुनाव को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। यहां तक कि संघ की बैठक में राजनीतिक विषय पर भी कोई डिस्कशन नहीं हुआ। बैठक में BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और हरियाणा के CM मनोहर लाल को बुलाए जाने पर संघ ने कहा कि यह परंपरा है।
आपको बता दें कि देश में 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और इससे पहले RSS की टॉप लीडरशिप की यह आखिरी बड़ी मीटिंग रही। इसमें सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, पांचों सह सरकार्यवाह, RSS की अखिल भारतीय कार्यकारिणी, क्षेत्रीय तथा प्रांतीय कार्यकारिणी, संघ के प्रतिनिधि, सभी विभाग प्रचारक और 34 अलग-अलग संगठनों के स्वयंसेवक शामिल हुए।
इससे पहले रविवार को सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने बताया था कि 2025 में संघ अपने स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में संघ 71355 स्थानों पर प्रत्यक्ष तौर पर कार्य कर समाज परिर्वतन के महत्वपूर्ण कार्य में अपनी भूमिका निभा रहा है और अगले एक वर्ष तक एक लाख स्थानों तक पहुंचना संघ का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि 2020 में आई कोरोना आपदा के बाद भी संघ कार्य बढ़ा है। 2020 में 38913 स्थानों पर 62491 शाखा, 20303 स्थानों पर साप्ताहिक मिलन तथा 8732 स्थानों पर मासिक मंडली चल रही थी। वहीं, में यह संख्या बढक़र अब 42613 स्थानों पर 68651 शाखाएं, 26877 स्थानों पर साप्ताहिक मिलन तथा 10412 स्थानों पर मासिक मंडली तक पहुंच गई है। संघ दृष्टि से देशभर में 911 जिले हैं, जिनमें से 901 जिलों में संघ का प्रत्यक्ष कार्य चलता है। 6663 खंडों में से 88 प्रतिशत खंडों में, 59326 मंडलों में से 26498 मंडलों में संघ की प्रत्यक्ष शाखाएं लगती हैं। शताब्दी वर्ष में संघ कार्य को बढ़ाने के लिए संघ के नियमित प्रचारकों व विस्तारकों के अतिरिक्त 1300 कार्यकर्ता दो वर्ष के लिए शताब्दी विस्तारक निकले हैं।
डॉ. वैद्य ने कहा कि सारे भारत का सारा समाज एक है, सब समान हैं, सब मेरे अपने हैं, मुझे समाज के लिए कुछ देना है, ऐसे विचारों की अनुभूति तथा संस्कार संघ की शाखा से आते हैं। संघ के स्वयंसेवक अपने दैनिक कार्यों में से समय निकालकर तथा अपनी जेब से पैसा खर्च कर समाज परिवर्तन में योगदान देते हुए संघ कार्य का विस्तार करते हैं। संघ की शाखा से व्यक्ति निर्माण होता है, जो आगे चलकर समाज में राष्ट्रीय विचारों का जागरण तथा समाज को साथ लेकर समाज परिवर्तन में अपनी भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि आज संघ के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है। लोग संघ को ढूंढ़ते हुए डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से संघ के साथ जुड़ने के लिए निवेदन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से 2022 तक ज्वाइन आरएसएस के माध्यम से संघ के पास 7,25,000 निवेदन आए हैं। इनमें से अधिकांश 20 से 35 आयु वर्ग के युवक हैं, जो समाज सेवा के लिए संघ से जुड़ना चाहते हैं। दैनिक शाखाओं में भी युवाओं की रुचि बढ़ रही है। संघ की 60 प्रतिशत शाखाएं विद्यार्थी शाखाएं हैं। पिछले एक वर्ष में 121137 युवाओं ने संघ का प्राथमिक शिक्षण प्राप्त किया है। आगामी वर्ष की योजना में देशभर में संघ शिक्षण के 109 शिक्षण वर्ग लगेंगे, जिसमें लगभग 20 हजार स्वयंसेवकों के शिक्षण प्राप्त करने का अनुमान है। उन्होंने संघ के शिक्षण के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि संघ के प्रथम वर्ष में 15 से 40 आयु वर्ग के स्वयंसेवक, द्वितीय वर्ष में 17 से 40 आयु वर्ग के स्वयंसेवक तथा तृतीय वर्ष में 25 से 40 आयु वर्ग के स्वयंसेवक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। 40 से अधिक आयु के स्वयंसेवकों के लिए विशेष प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाते हैं।
डॉ. वैद्य ने कहा कि यह भगवान महावीर निर्वाण का 2550 महोत्सव वर्ष हैं, आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती के जन्म के 200 वर्ष तथा शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के 350 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इन तीनों के संदर्भ में भी प्रतिनिधि सभा में वक्तव्य पारित होंगे। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता के अमृतकाल को ध्यान में रखकर एक प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा।