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अंतरराष्ट्रीय

ब्रिटेन के डॉक्टरों ने किया चमत्कार, दवा से पूरी तरह से ठीक हुई कैंसर पीड़ित महिला

लंदन : ब्रिटेन के डॉक्टरों ने चमत्कार कर दिया है। यहां के डॉक्टरों ने कैंसर से जूझ रही एक भारतीय मूल की महिला को पूरी तरह से ठीक कर दिया है। जी हां कुछ साल पहले डॉक्टरों ने इस महिला को बताया गया था कि उसके पास जीने के लिए अब कुछ ही महीने बचे हैं,  लेकिन आज उस महिला के लिए बहुत बड़ा दिन है। लंबे समय से मौत के खौफ के साथ जी रही महिला उस वक्त खुशी से झूम उठी, जब डॉक्टरों ने उसे बताया कि अब उसमें ब्रेस्ट कैंसर के कोई लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं। महिला ब्रिटेन के एक अस्पताल में एक क्लिनिकल ट्रायल में शामिल थी। कुछ हफ्तों पहले खबर आई थी कि कैंसर की एक दवा ने क्लिनिकल ट्रायल में शत प्रतिशत नतीजे दिखाए थे।

एनएचएस (NHS) यानी नेशनल हेल्थ सर्विस के सफल परीक्षण के बाद अब मैनचेस्टर के फेलोफील्ड की 51 वर्षीय जैस्मिन डेविड अब पूरी तरह ठीक है और  सितंबर में अपनी शादी की 25वीं सालगिरह मनाने की तैयारी कर रही हैं। क्रिस्टी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर रिसर्च (एनआईएचआर) मैनचेस्टर क्लिनिकल रिसर्च फैसिलिटी (सीआरएफ) में डेविड के दो साल के ट्रायल में एक एक्सपेरिमेंटल दवा शामिल थी,  जिसमें एटेज़ोलिज़ुमाब का इस्तेमाल किया गया था, यह एक इम्यूनोथेरेपी दवा होती है जिसे वह हर तीन हफ्ते में लेती थीं।

डेविड ने बताया कि मेरे कैंसर के शुरुआती इलाज के 15 महीने पूरे हो चुके थे और मैं इसके बारे में पूरी तरह भूल गई थी लेकिन फिर कैंसर लौट आया। उन्होंने कहा, “जब मुझे इस परीक्षण में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया, मुझे नहीं पता था कि यह मुझ पर काम करेगा या नहीं। लेकिन मैंने सोचा कि कम से कम मैं दूसरों की मदद करने के लिए कुछ कर सकती हूं और अपने शरीर का इस्तेमाल अगली पीढ़ी के लिए कर सकती हूं।“

महिला ने बताया कि शुरुआत में मुझे कई साइड इफेक्ट्स का सामना करना पड़ा जैसे बुखार और सिरदर्द। इसलिए मैं अस्पताल में थी और काफी बीमार थी। शुक्र है कि फिर मुझ पर इलाज का अच्छा असर दिखने लगा। बेहद फिट और दो बच्चों की मां जैस्मिन डेविड बुजुर्गों के एक केयर होम में क्लिनिकल लीड के तौर पर काम करती हैं। नवंबर 2017 में उन्हें अपनी ब्रेस्ट एक गांठ महसूस हुई, यह ब्रेस्ट कैंसर की ट्रिपल नेगेटिव फॉर्म थी।

महिला को अप्रैल 2018 में छह महीने की कीमोथेरेपी और एक मास्टेक्टॉमी से गुजरना पड़ा। इसके बाद रेडियोथेरेपी के 15 राउंड्स ने उनके शरीर को कैंसर से मुक्त कर दिया। लेकिन अक्टूबर 2019 में कैंसर वापस आ गया और स्कैन में उनके पूरे शरीर में कई घाव दिखाई दिए जिसका मतलब था कि उनकी हालत बेहद खराब थी। कैंसर उनके फेफड़े, लिम्फ नोड्स और छाती की हड्डी में फैल गया था। डॉक्टरों ने उन्हें बुरी खबर दी कि उनके पास अब जीने के लिए एक साल से भी कम समय बचा है।

Shobha Ojha

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